Monday, August 21, 2017

म्यांमार से भागा रोहिंग्या मुसलमान।

म्यांमार से भागा रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश क्यों नहीं जाता, भारत क्यों आता है?

सीरिया से भागा मुसलमान सऊदी अरब या ईरान क्यों नहीं जाता, यूरोप और इंग्लैंड कैसे पहुँच जाता है?

फिलिस्तीन पर रोने वाले इतने मुस्लिम देशों में कोई भी इस फिलिस्तीनियों को कभी शरण क्यों नहीं देता?

दुनिया भर में कहीं भी मार-काट मचा कर भागे मुसलमानों को शरणार्थी बनने के लिए कोई यहूदी, हिन्दू या ईसाई पश्चिमी देश ही क्यों याद आते हैं?
यह शरण मांगना भी एक लड़ाई है. ये भागे हुए लोग नहीं हैं...ये जहाँ भी हैं, अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं और ज्यादा सफल तरीके से लड़ रहे हैं. आखिरी मकसद है ज़मीन पर कब्ज़ा...काफिरों की ज़मीन पर अल्लाह के बंदों का कब्ज़ा. यह रिफ्यूजी-जिहाद है...शरण में आये लोग नहीं...भूखा बच्चा, बदहाल औरत, लाचार आदमी...ये सभी इनके हथियार है.. एक्सपैंशन केअमरीका की NRA अक्सर याद दिलाती रहती है: Guns do not kill people, persons do.

स्पेन के लोगों को आज पता चला, बहुत दर्दनाक तरीक़े से, कि हत्या का इरादा हो तो हथियार तो हवा में से पैदा हो जाते है।

स्पेन ने कभी अपने यहाँ से मुसलमानो को vacuum clean किया था।
पाँच सौ साल में अपना इतिहास भूल गए वे लोग। वामपंथी आए और मुसलमानो को वापिस बूला लिया।

परिणामस्वरूप बार्सिलोना में तेरह लोग सड़क पर मृत पड़े है।
NRA लेकिन ग़लत है। मनुष्य भी नहीं मारते। विचार मारता है।

अफ़ग़ानिस्तान में आज भी सारे हिंदू होते तो........
सबसे बड़ा उदाहरण है भारत। उसी जाति के लोग हिंदू भी है व मुसलमान भी। मुसलमान हो गए उसी जाति के लोग अरब के क़बिलाई व्यक्ति की तरह ही बन गए है।

बदला क्या? विचार। हिंदू ऑपरेटिंग सिस्टम की जगह इस्लाम ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल हो गया।
विचार मारते है।

इस्लाम नाम के विचार को जब तक समाप्त नहीं किया जाता, ऐसे ही फ़ुट्पाथ से अपनो के शव खुरचते रहेंगे काफ़िर।

और समाप्त करने का एक मात्र तरीक़ा है कि मज़हब के बुर्क़े में छुपे इस माफ़िया गैंग का सच जाने, सच फैलायें।
ख़ून पीने वाली जोंक पर नमक छिड़क दो वो मर जाती है।

सच इस्लाम के विरुद्ध नमक हथियार हैं... महर्षि चरक ने चरक संहिता में लिखा है "जो रोग जहाँ उत्पन्न होता है उसकी औषधि वहीँ मौजूद होती है"..आतंकवाद का रोग ७२ हूरों वाले अंधविश्वास की वजह से जन्म लेता है और इसका इलाज भी अन्धविश्वास से ही होगा..आतंकियों के शवों को कूड़े के ढेर में जलाना पड़ेगा जिससे उनकी जन्नत वाली फ्लाइट पंक्चर हो..हमें पता है ऐसा कुछ नहीं होता पर उनके लिए तो ७२ हूरे कलश सजाकर बैठी है न ......अपने को विश्वगुरु कहते घूमते हैं हम तो 'गुरूजी' दो न आतंकवाद का इलाज दुनिया को...नैतिकता वैतिकता के चक्कर में वही गलती मत दोहराना जो पृथ्वीराज चौहान ने 'धर्मयुद्ध' के चक्कर में १६ बार हराकर छोड़ दिया था गौरी को..??

भाड़ में गया धर्मयुद्ध
और
नैतिकता का पाठ..??
ईस्लाम के जानवर समाज के कैंसर हैं और इसका सर्जरी अनिवार्य है !!

किस मौसम में कौन सा पानी पिए।

पानी और बर्तन का ये अधभुत विज्ञानं आपको कोई नहीं बताएगा- 
नमस्कार दोस्तों! यहाँ आपको राजीव जी के बताये घरेलू नुस्खे एवं औषधियां प्राप्त होंगी. तो दोस्तों आज की हमारी चर्चा का विषय है कि किस मौसम में कौन-से बर्तन में पानी पीना ठीक रहता है. गर्मियों का सीजन शुरू होता है होली के बाद से और बारिश के पहले दिन तक मिट्टी के बर्तन में रखे हुए पानी को ही पीना अच्छा रहता है. रात हो या दिन हमेशा जब बारिश शुरु हो जाती है तो उस दिन से लेकर बारिश के अंतिम दिन तक तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीना हमेशा अच्छा रहता है।

इसके बाद जब बारिश खत्म होती है तब जाकर सर्दियां शुरु होती है. उस दिन से लेकर फिर होली के दिन तक सोने के बर्तन में रखा हुआ पानी सबसे अच्छा होता है. अब सवाल ये उठता है कि भाई सोने के बर्तन कहां से आएंगे इतनी महंगाई के जमाने में? तो जवाब है कि आप कोई भी बर्तन रख लीजिए उसमें एक सोने की अंगूठी डाल दीजिए या फिर सोने की एक चैन डालकर छोड़ दीजिए।

इससे आपको कुछ फायदा होगा ही पर नुकसान बिलकुल नहीं होगा. सोना बहुत गर्म धातु है और चांदी बहुत ठंडी. तो गर्मियां है तो सोने का पानी जहर है लेकिन वहीं पानी अमृत है जब ठंड का मौसम है. तो ठंड के समय में सोने की अंगूठी में पड़ा हुआ पानी इस्तेमाल करें. राजीव जी ने बताया की वह इस पानी को मेडिसिन के रूप में इस्तेमाल करते हैं. जिनको चक्कर आते हैं, हाथ-पैर टेढ़े हो जाते हैं, मिर्गी के मरीज हैं, जिनको मेंटल डिप्रेशन बहुत होता है, ये सोने का बर्तन उनके लिए सबसे बेस्ट मेडिसिन है. जिनको हमेशा बुरे-बुरे विचार आते रहते हैं कि “अभी मैं मर जाऊंगा”, “अभी वह मर जाएगा” या ऐसा कुछ भी जो पॉजिटिव नहीं है तो उनके लिए भी ये सोने के बर्तन में रखा पानी बेस्ट मेडिसिन है।

जिनको कभी भी अच्छी नींद नहीं आती या रात में वह हमेशा शिकायत करते हैं कि वह सोये नहीं, उनके लिए भी ये बेस्ट मेडिसिन है. जिनका माइंड कभी डेवलप नहीं हो पाया, बहुत बार ऐसा होता है ना कि इन्सान का शरीर बढ़ जाता है, लेकिन माइंड बच्चे का ही रहता है. ऐसे बहुत सारे केस आपके जीवन में आ सकते हैं उनके लिए बेस्ट मेडिसिन है सोने के बर्तन में रखा हुआ पानी।

और आखिरी बात कह दूं के हर बीमारी की बेस्ट मेडिसिन है सोने के बर्तन में रखा हुआ पानी. भले वो कफ हो या सर्दी हो या फिर खांसी-जुकाम, माइग्रेन है तो उनके लिए भी ये बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. 4 महीने जब सर्दियां है तो सोने के बर्तन में रखा पानी पिए और 4 महीने जब गर्मी है तो मिट्टी के घड़े का पानी पीये. और 4 महीने जब बारिश है तो तांबे के बर्तन का पानी पीना है।

पानी पीने का सबसे अच्छा तरीका है सबसे पहले गर्म कर लें या उबाल लें, फिर उसको रुम टेंपरेचर पर ठंडा हो जाने दीजिए. उसके बाद उसको बर्तन में डाल दीजिए चाहे वह मिट्टी का बर्तन हो चाहे तांबे का हो या फिर सोने का हो. फिर उसी को दिनभर पीते रहिए हर समय गर्म करके पीने की जरूरत नहीं है एक बार गर्म करके रूम टेंपरेचर पर ठंडा कर दीजिए फिर उसको किसी भी बर्तन में डालकर सवेरे से शाम तक यूज करते रहिए।

Sunday, August 20, 2017

स्वामी श्रद्धानन्द और मोहनदास करमचंद गाँधी।

हिन्दू-मुस्लिम दंगे फैले थे। गाँधी जी स्वामी श्रद्धानन्द जी से मिलने के लिए उनके आवास पर जाते है।
दोनों में अभिवादन हुआ।
गाँधी जी - स्वामी जी आपसे कुछ बात करनी थी, एकांत में।
स्वामी जी - आइये
फिर दोनों के सेवक बाहर रुकते है और स्वामी जी गाँधी जी को अंदर ले जाते है।
गाँधी जी - स्वामी जी दंगो के कारण हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बड़ा बुरा असर पड़ रहा है। आपके कहने से दंगे रुक सकते है। आप हिन्दुओ को कहिये कि वो मुसलमानो को न मारे। हिन्दू-मुस्लिम एकता आवश्यक है।
स्वामी जी - और इस हिन्दू-मुस्लिम एकता का स्वरुप क्या होगा गाँधी जी?
एकता परस्पर होती है। प्रेम और एकता एक दूसरे के भावनाओ के सम्मान पर टिकी होती है।
गाँधी जी - स्वामी जी हिन्दू-मुस्लिम एकता के बिना "स्वराज" नहीं मिल पायेगा।
स्वामी जी - ये भ्रम क्यों फैलाया जा रहा है गाँधी जी?
गाँधी जी - स्वामी जी आप अपने संगठन "भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा" (घर वापसी के लिए स्थापित) को बंद कर दीजिये।
स्वामी जी - ठीक है!
यदि आप चाहते है की मैं "भारतीय हिन्दू शुद्धि सभा" को बंद कर दूँ, शुद्धि सभा का अभियान बंद कर दूँ, तो मैं कर देता हूँ, किन्तु क्या आप इतने ही अधिकारपूर्वक मुसलमानो से ये बात कह पाएंगे कि वो ज़बरदस्ती हिन्दुओ का धर्म-परिवर्तन बंद कर दें।
गाँधी जी - स्वामी जी हमे आपका सहयोग चाहिए।
स्वामी श्रद्धानन्द - मैंने तो सदैव ही आपके साथ सहयोग किया है। जब आप साऊथ अफ्रीका में आंदोलन चला रहे थे उस समय हमने और हमारे गुरुकुल के बच्चों ने सर पर मिटटी ढो के आपके आंदोलन के सहयोग के लिए पैसे भेजे थे। बच्चों ने घी-दूध तक पीना-खाना छोड़ दिया था।
गाँधी जी - इस बात के लिए मैं सदैव आपका ऋणी रहूँगा।
स्वामी जी - तो आपके साथ तो असहयोग की कोई बात ही नहीं है, किन्तु आज आवश्यकता इस बात की है कि इस देश की बहुसंख्यक जनता की भावनाओ को भी समझा जाए।
गाँधी जी लौट गए। फिर समाचार पत्रो में छपा की "गाँधी जी अनशन पर गए"। 21 दिन के बाद गाँधी जी ने अनशन तोडा। गाँधी जी इसी प्रकार "ब्लैकमेल" की राजनीति करते थे।
इस बात पर स्वामी श्रद्धानन्द जी बहुत दुखी हुए और गंगा किनारे संध्या के समय ईश्वर से प्रार्थना की और कहा- "हे ईश्वर! मुझे शक्ति दो। मुझे शक्ति दो की मैं राजनितिक अवसरवादिता से लड़ सकूँ। तुम्हारी सृष्टि में पल रहे मानवमात्र की सेवा कर सकूँ। अपने जीवन की हर सांस उनके उत्थान में अर्पित करूँ। चाहे जितना भी षड्यंत्र हो, जितना भी विरोध हो मैं सत्य के मार्ग से कभी न डिगु और सदैव मानवता की सेवा करता रहूँ। मुझे शक्ति दो ईश्वर, मुझे शक्ति दो।"
कुछ कुछ अज्ञानी लोग गाँधी जी के लेख दिखाकर कहते है कि गाँधी जी कहते थे कि आर्य समाज साम्प्रदायिकता और झगड़ें फैलाता है। क्या वो सभी गाँधी जी के प्रत्येक कार्य से सहमत है। गाँधी जी एक सर्वमान्य नेता बनने की चाह में बहुसंख्यको की भावनाओ को नज़रअंदाज़ करते थे। उन्होंने हिन्दू समाज, दलितों, विधवाओ की आवाज ही नहीं उठाई सहारा भी दिया, फिर भी स्वामी जी को गाँधी जी की अवसरवादिता भरी राजनीति का शिकार होकर मुसलमानो से सीने में गोली खानी पड़ी और बलिदान दिया। स्वामी श्रद्धानन्द जी ने अछूत शब्द को जातिसूचक मानते हुए दलित शब्द को प्राथमिकता देते हुए कहा कि आर्थिक स्थिति का सूचक शब्द दलित है अतः अछूतों को दलित कहा गया। स्वामी श्रद्धानन्द, पंडित लेखराम, महाशय राजपाल, महात्मा फूल सिंह ये महापुरुष वैदिक धर्म की रक्षा करते हुए मुसलमानो की गोली और खंजर का शिकार हुए। यदि हिन्दू समाज उसी समय सचेत होता और आर्य समाज का साथ देता तो केरल, बंगाल, कश्मीर, कैराना जैसी स्थिति कभी न आती।

Friday, August 18, 2017

मिटटी के बर्तन एवम आपका भाग्य।

जानिए कैसे मिटटी के बर्तन द्वारा आप अपना किस्मत/भाग्य संवार सकते हैं .

जिंदगी में हमें कई ऐसी चीजें हैं जो बहुत प्रिय होती हैं और हम चाहते हैं कि वो हमेशा हमारे पास रहें। लेकिन बहुत कुछ कर लेने के बाद भी वो चीजें हमारे पास नहीं रहती हैं।

क्या आप जानते हैं की आपके घर में रखे मिट्टी के बर्तन भी आपका भाग्य चमका सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार मिट्टी के बर्तनों को बहुत पवित्र माना गया है। पहले मिट्टी के बने बर्तनों में खाना खाया जाता था। घर में रखें मिट्टी के बर्तन एक तरफ जहां आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं बल्कि इनके घर या ऑफिस में होने से गुडलक, धन-वैभव, सफलता सब कुछ हासिल किया जा सकता है। पूजा घर से लेकर विवाह के मौके पर पूजा के लिए इस्तेमाल किए जानें वाले सभी बर्तन मिट्टी के होते हैं।

जानिए क्यों नहीं रखें खंडित बर्तन अपने घर में—
घर में इस्तेमाल होने वाले बर्तन हमारे जीवन स्तर को इंगित करते हैं। इसी कारण इन दिनों सुंदर डिजाइन वाले बर्तनों का चलन बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। इसी चलन के कारण कई घरों में पुराने या टूटे-फूटे बर्तनों को संभालकर स्टोर रूम में रख दिया जाता है, जो कि वास्तु की दृष्टि से अशुभ है तथा इसे वास्तु विज्ञान में एक दोष की भांति देखा जाता है। टूटे-फूटे बर्तन दरिद्रता की ओर संकेत करते हैं तथा इन्हें घर में जगह देने से घर में दरिद्रता बढ़ती है और कई तरह की आर्थिक हानि भी हो सकती है।

राहू ग्रह अशुभता का परम सूचक माना जाता है। टूटे-फूटे तथा खंडित चीनी मिट्टी के बर्तन राहू का प्रतीक हैं। ज्योतिषशास्त्र की लाल किताब में हमेशा से ही इस बात पर जोर दिया जाता है कि घरों में टूटे-फूटे बर्तन नहीं रखने चाहिए, न ही कभी ऐसे बर्तनों में भोजन करना चाहिए। जो व्यक्ति टूटे-फूटे बर्तनों में खाना खाता है उससे धन की देवी लक्ष्मी रूठ जाती हैं और उसके घर में अलक्ष्मी अर्थात दरिद्रता का निवास होता है। ऐसा होने पर कई प्रकार के नुकसान का सामना करना पड़ता है।

जानिए कैसे करें सरल समाधान — आपको अपने घर से सभी टूटे-फूटे, खंडित, दरार पड़े हुए तथा बेकार बर्तनों को हटा देना चाहिए। इससे वास्तु दोष का परिहार हो जाता है तथा घर में लक्ष्मी पुनः वास करती हैं। खंडित बर्तन में खाना खाने से हमारी जीवनशैली नकारात्मक बनती है। जैसे बर्तनों में हम भोजन करते हैं हमारा स्वभाव और स्वास्थ्य भी वैसा ही बन जाता है। इसी वजह से अच्छे और साफ बर्तनों में भोजन करें। इससे आपके विचार भी शुद्ध होंगे और सकारात्मक ऊर्जा का शुभ प्रभाव आप पर पड़ेगा और आप सफलता के शिखर पर पहुचने में सफल होंगे।

01-वास्तुशास्त्र में बताया गया है की अगर घर की उत्तर पूर्व दिशा में मिटटी के बर्तन में पानी भरकर रखा जाये तो घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता है. इसके अलावा स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी यह फायदेमंद होता है. वास्तुशास्त्र में बताया गया है है तनाव या फिर किसी मानसिक समस्या का शिकार होने पर घड़े में रखा पानी पीने से तनाव दूर हो जाता है | अथवा घर में उत्तर पूर्व दिशा में मिटटी के घड़े में पानी भरकर रखें इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। सेहत के लिहाज से देखा जाए तो और भी फायदेमंद है। वास्तु के अनुसार अगर कोई तनाव या फिर किसी मानसिक समस्या का शिकार है तो उसे घड़े में रखा पानी पीना चाहिए।

02— आप ये भी जान ले की घर में पूजा के लिए भगवान की मूर्ति अगर मिट्टी के लाएंगो तो इससे आपके घर में हमेशा बरकत रहेगी क्यों की मिटटी को शुद्ध माना जाता है यही नहीं घर में मिट्टी के सजावटी बर्तन जैसे कटोरी, फ्लावर पॉट को दक्षिण-पूर्व दिशा में रख सकते हैं। कहते हैं इससे घर में सौभाग्य तो आता है।
03 .– अमावस्या के दिन मिट्टी के बर्तन में काले तिल और पानी लें। दक्षिण की तरफ बैठकर इस मंत्र का जाप करें ‘ओम पित्र देवाय नमः ओम शांति भवाह’। ऐसा करने से आपको फायदा होगा। इसके अलावा आप अमावस्या के दिन गाय या किसी गरीब को खाना खिलाएं।
04 .– भारतीय सभ्यता में प्राचीन काल से ही मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने की प्रथा रही है |आज भले ही साइंस ने कितनी भी तरक्की क्यों न कर ली हो, लेकिन स्वास्थ्य के नजरिए से देखा जाए तो मिट्टी की हांडी में खाना पकाना आज के प्रेशर कुकर की तुलना में कई गुना ज्यादा लाभकारी सिद्ध होता है |
05 .– घर में समृद्धि लाने हेतु घर के उत्तरपश्चिम के कोण (वायव्य कोण) में सुन्दर से मिट्टी के बर्तन में कुछ सोने-चांदी के सिक्के, लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर बर्तन को गेहूं या चावल से भर दें। ऐसा करने से घर में धन का अभाव नहीं रहेगा।
06 .– भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष भरणी नक्षत्र के दिन चार घड़ों में पानी भरकर किसी एकान्त कमरे में रख दें। अगले दिन जिस घड़े का पानी कुछ कम हो उसे अन्न से भरकर प्रतिदिन विधिवत पूजन करते रहें। शेष घड़ों के पानी को घर, आँगन, खेत आदि में छिड़क दें। अन्नपूर्णा देवी सदैव प्रसन्न रहेगीं।
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जानिए मिटटी के बर्तनों द्वारा कैसे होगा स्वास्थ्य लाभ—
मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त है मिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।इंसान के शरीर को रोज 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्व मिलने चाहिए. जो केवल मिट्टी से ही आते हैं. एल्यूमीनियम के प्रेशर कूकर में खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं. पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल 7 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं. कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल 3 प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं. केवल मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं. और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है. लेकिन प्रेशर कूकर एल्यूमीनियम का होता है, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. जिससे टी.बी., डायबिटीज, अस्थमा हो सकता है. प्रेशर कूकर के भाप से भोजन पकता नहीं है बल्कि उबलता है. आयुर्वेद के अुनसार खाना पकाते समय उसे हवा का स्पर्श और सूर्य का प्रकाश मिलना जरूरी है |मिट्टी के बर्तनों में प्लास्टिक, डाई, माइका आदि नहीं होता है। इसमें पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम, फासफोरस जैसे प्राकृतिक रूप से लाभकारी खनिज पाए जाते हैं। जिसका प्रकृति और पर्यावरण पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। यानि शुद्ध मिट्टी का कम्पोजीशन ऐसा होता है जो आप खा भी सकते हैं और इसका कोई नुकसान भी नहीं होता।

मिट्टी के बर्तनों में पकी दाल-सब्जी में धातु विषैले तत्व और चमक पैदा करने वाले रसायनों की मिलावट भी नहीं होती है। मिट्टी उष्णता की कुचालक है अत: इस तरह के बर्तनों में भोजन पकाने से उसे धीरे-धीरे उष्णता प्राप्त होती है, जिसके परिणामस्वरूप दालसब्जी में प्रोटीन शतप्रतिशत सुरक्षित रहता है। यदि कांसे के बर्तन में खाना पकाया जाए तो कुछ प्रोटीन का क्षरण हो जाता है व एल्युमिनियम के बर्तन में पकाने से 87 प्रतिशत प्रोटीन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाता है। भोजन में कुछ एल्युमिनियम चले जाने से एल्जाइमर, पार्किन्सन आदि अनेक बीमारियां हो जाती हैं।

मिट्टी के ये बर्तन कई तरह के मिलते हैं. जिनमें सिरेमिक, क्ले, क्रीमवियर पॉट्स और पैन्स या टेराकोटा के बने हुए बर्तन मिल जाएंगे. इनकी कई तरह की रेंज आपको मिल सकती है. आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से इनका चुनाव कर सकते हैं और इनसे मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ हासिल कर सकते हैं |

अगर आप भी जीना चाहते हैं स्वस्थ जीवन तो ज्यादा से ज्यादा मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करें. बहुत ही कम लोग इस बात को मानेगें लेकिन ये बात तो सच है कि यदि शरीर को रोगमुक्त और लंबी उम्र तक जीना है, तो मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने की आदत डालें |

क्या होगा ऐसा करने से ..??
मिट्टी के बर्तनों की उपयोगिता को समझकर उसमें खाना पकाने से मिट्टी से जुड़े लोगों को काम मिलेगा और हमें स्वास्थ्यकर भोजन।
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जानिए सोने चांदी के बर्तन का प्रभाव — चांदी के बर्तनों में भोजन करना तन, मन और धन के लिए अनुकुल माना गया है क्योंकि इसकी तासीर ठंडी होती है जिससे शरीर की गर्मी का नाश होता है। सोने के बर्तनों में भोजन करने से शरीर ठोस, सशक्त और पराक्रमी बनता है। पुरूषों के लिए सोने के बर्तनों में भोजन करना लाभदायक माना गया है।

रिफाईनड तेल।

सबसे ज्यादा मौतें देने वाला भारत में कोई है l
तो वह है...
               *रिफाईनड तेल*

केरल आयुर्वेदिक युनिवर्सिटी आंफ रिसर्च केन्द्र के अनुसार, हर वर्ष 20 लाख लोगों की मौतों का कारण बन गया है... *रिफाईनड तेल*

आखिर भाई राजीव दीक्षित जी के कहें हुए कथन सत्य हो ही गये!

रिफाईनड तेल से *DNA डैमेज, RNA नष्ट, , हार्ट अटैक, हार्ट ब्लॉकेज, ब्रेन डैमेज, लकवा शुगर(डाईबिटीज), bp नपुंसकता *कैंसर* *हड्डियों का कमजोर हो जाना, जोड़ों में दर्द,कमर दर्द, किडनी डैमेज, लिवर खराब, कोलेस्ट्रोल, आंखों रोशनी कम होना, प्रदर रोग, बांझपन, पाईलस, स्केन त्वचा रोग आदि!. एक हजार रोगों का प्रमुख कारण है।*

*रिफाईनड तेल बनता कैसे हैं।*

बीजों का छिलके सहित तेल निकाला जाता है, इस विधि में जो भी Impurities तेल में आती है, उन्हें साफ करने वह तेल को स्वाद गंध व कलर रहित करने के लिए रिफाइंड किया जाता है
*वाशिंग*-- वाशिंग करने के लिए पानी, नमक, कास्टिक सोडा, गंधक, पोटेशियम, तेजाब व अन्य खतरनाक एसिड इस्तेमाल किए जाते हैं, ताकि Impurities इस बाहर हो जाएं |इस प्रक्रिया मैं तारकोल की तरह गाडा वेस्टेज (Wastage} निकलता है जो कि टायर बनाने में काम आता है। यह तेल ऐसिड के कारण जहर बन गया है।

*Neutralisation*--तेल के साथ कास्टिक या साबुन को मिक्स करके 180°F पर गर्म किया जाता है। जिससे इस तेल के सभी पोस्टीक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

*Bleaching*--इस विधी में P. O. P{प्लास्टर ऑफ पेरिस} /पी. ओ. पी. यह मकान बनाने मे काम ली जाती है/ का उपयोग करके तेल का कलर और मिलाये गये कैमिकल को 130 °F पर गर्म करके साफ किया जाता है!

*Hydrogenation*-- एक टैंक में तेल के साथ निकोल और हाइड्रोजन को मिक्स करके हिलाया जाता है। इन सारी प्रक्रियाओं में तेल को 7-8 बार गर्म व ठंडा किया जाता है, जिससे तेल में पांलीमर्स बन जाते हैं, उससे पाचन प्रणाली को खतरा होता है और भोजन न पचने से सारी बिमारियां होती हैं।
*निकेल*एक प्रकार का Catalyst metal (लोहा) होता है जो हमारे शरीर के Respiratory system,  Liver,  skin,  Metabolism,  DNA,  RNA को भंयकर नुकसान पहुंचाता है।

रिफाईनड तेल के सभी तत्व नष्ट हो जाते हैं और ऐसिड (कैमिकल) मिल जाने से यह भीतरी अंगों को नुकसान पहुंचाता है।

जयपुर के प्रोफेसर श्री राजेश जी गोयल ने बताया कि, गंदी नाली का पानी पी लें, उससे कुछ भी नहीं होगा क्योंकि हमारे शरीर में प्रति रोधक क्षमता उन बैक्टीरिया को लडकर नष्ट कर देता है, लेकिन रिफाईनड तेल खाने वाला व्यक्ति की अकाल मृत्यु होना निश्चित है!

*दिलथाम के अब पढे*

*हमारा शरीर करोड़ों Cells (कोशिकाओं) से मिलकर बना है, शरीर को जीवित रखने के लिए पुराने Cells नऐ Cells से Replace होते रहते हैं नये Cells (कोशिकाओं) बनाने के लिए शरीर खुन का उपयोग करता है, यदि हम रिफाईनड तेल का उपयोग करते हैं तो खुन मे Toxins की मात्रा बढ़ जाती है व शरीर को नए सेल बनाने में अवरोध आता है, तो कई प्रकार की बीमारियां जैसे* -— कैंसर *Cancer*,  *Diabetes* मधुमेह, *Heart Attack* हार्ट अटैक, *Kidney Problems* किडनी खराब,
*Allergies,  Stomach Ulcer,  Premature Aging,  Impotence,  Arthritis,  Depression,  Blood pressure आदि हजारों बिमारियां होगी।*

रिफाईनड तेल बनाने की प्रक्रिया से तेल बहुत ही मंहगा हो जाता है, तो इसमे पांम आंयल मिक्स किया जाता है! (पांम आंयल सवमं एक धीमी मौत है)

*सरकार का आदेश*--हमारे देश की पॉलिसी अमरिकी सरकार के इशारे पर चलती है। अमरीका का पांम खपाने के लिए,मनमोहन सरकार ने एक अध्यादेश लागू किया कि,
प्रत्येक तेल कंपनियों को 40 %
खाद्य तेलों में पांम आंयल मिलाना अनिवार्य है, अन्यथा लाईसेंस रद्द कर दिया जाएगा!
इससे अमेरिका को बहुत फायदा हुआ, पांम के कारण लोग अधिक बिमार पडने लगे, हार्ट अटैक की संभावना 99 %बढ गई, तो दवाईयां भी अमेरिका की आने लगी, हार्ट मे लगने वाली  स्प्रिंग(पेन की स्प्रिंग से भी छोटा सा छल्ला) , दो लाख रुपये की बिकती हैं,
यानी कि अमेरिका के दोनो हाथों में लड्डू, पांम भी उनका और दवाईयां भी उनकी!

*अब तो कई नामी कंपनियों ने पांम से भी सस्ता,, गाड़ी में से निकाला काला आंयल* *(जिसे आप गाडी सर्विस करने वाले के छोड आते हैं)*
*वह भी रिफाईनड कर के खाद्य तेल में मिलाया जाता है, अनेक बार अखबारों में पकड़े जाने की खबरे आती है।*

सोयाबीन एक दलहन हैं, तिलहन नही...
दलहन में... मुंग, मोठ, चना, सोयाबीन, व सभी प्रकार की दालें आदि होती है।
तिलहन में... तिल, सरसों, मुमफली, नारियल, बादाम,ओलीव आयल, आदि आती है।
अतः सोयाबीन तेल ,  पेवर पांम आंयल ही होता है। पांम आंयल को रिफाईनड बनाने के लिए सोयाबीन का उपयोग किया जाता है।
सोयाबीन की एक खासियत होती है कि यह,
प्रत्येक तरल पदार्थों को सोख लेता है,
पांम आंयल एक दम काला और गाढ़ा होता है,
उसमे साबुत सोयाबीन डाल दिया जाता है जिससे सोयाबीन बीज उस पांम आंयल की चिकनाई को सोख लेता है और फिर सोयाबीन की पिसाई होती है, जिससे चिकना पदार्थ तेल तथा आटा अलग अलग हो जाता है, आटा से सोया मंगोडी बनाई जाती है!
आप चाहें तो किसी भी तेल निकालने वाले के सोयाबीन ले जा कर, उससे तेल निकालने के लिए कहे!महनताना वह एक लाख रुपये  भी देने पर तेल नही निकालेगा, क्योंकि. सोयाबीन का आटा बनता है, तेल नही!

फॉर्च्यून.. अर्थात.. आप के और आप के परिवार के फ्यूचर का अंत करने वाला.

सफोला... अर्थात.. सांप के बच्चे को सफोला कहते हैं!
*5 वर्ष खाने के बाद शरीर जहरीला
10 वर्ष के बाद.. सफोला (सांप का बच्चा अब सांप बन गया है.
*15 साल बाद.. मृत्यु... यानी कि सफोला अब अजगर बन गया है और वह अब आप को निगल जायगा.!*

*पहले के व्यक्ति 90.. 100 वर्ष की उम्र में मरते थे तो उनको मोक्ष की प्राप्ति होती थी, क्योंकि.उनकी सभी इच्छाए पूर्ण हो जाती थी।*

*और आज... अचानक हार्ट अटैक आया और कुछ ही देर में मर गया....?*
*उसने तो कल के लिए बहुत से सपने देखें है, और अचानक मृत्यु..?*
अधुरी इच्छाओं से मरने के कारण.. प्रेत योनी मे भटकता है।

*राम नही किसी को मारता.... न ही यह राम का काम!*
*अपने आप ही मर जाते हैं.... कर कर खोटे काम!!*
गलत खान पान के कारण, अकाल मृत्यु हो जाती है!

*सकल पदार्थ है जग माही..!*
*कर्म हीन नर पावत नाही..!!*
अच्छी वस्तुओं का भोग,.. कर्म हीन, व आलसी व्यक्ति संसार की श्रेष्ठ वस्तुओं का सेवन नहीं कर सकता!

*तन मन धन और आत्मा की तृप्ति के लिए सिर्फ ओलीव आयल ,राइस ब्रान , कच्ची घाणी का तेल, तिल सरसों, मुमफली, नारियल, बादाम आदि का तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए!* पोस्टीक वर्धक और शरीर को निरोग रखने वाला सिर्फ कच्ची घाणी का निकाला हुआ तेल ही इस्तेमाल करना चाहिए!
आज कल सभी कम्पनी.. अपने प्रोडक्ट पर कच्ची घाणी का तेल ही लिखती हैं!
वह बिल्कुल झूठ है.. सरासर धोखा है!
कच्ची घाणी का मतलब है कि,, लकड़ी की बनी हुई, औखली और लकडी का ही मुसल होना चाहिए! लोहे का घर्षण नहीं होना चाहिए. इसे कहते हैं.. कच्ची घाणी.
जिसको बैल के द्वारा चलाया जाता हो!
आजकल बैल की जगह मोटर लगा दी गई है!
लेकिन मोटर भी बैल की गती जितनी ही चले!
लोहे की बड़ी बड़ी सपेलर (मशिने) उनका बेलन लाखों की गती से चलता है जिससे तेल के सभी पोस्टीक तत्व नष्ट हो जाते हैं और वे लिखते हैं.. कच्ची घाणी...
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यह लोगों के प्राण बचाने की मुहिम हैं, यह व्यापार नहीं,,  स्वास्थ्य की सेवा है,