Monday, August 21, 2017

म्यांमार से भागा रोहिंग्या मुसलमान।

म्यांमार से भागा रोहिंग्या मुसलमान बांग्लादेश क्यों नहीं जाता, भारत क्यों आता है?

सीरिया से भागा मुसलमान सऊदी अरब या ईरान क्यों नहीं जाता, यूरोप और इंग्लैंड कैसे पहुँच जाता है?

फिलिस्तीन पर रोने वाले इतने मुस्लिम देशों में कोई भी इस फिलिस्तीनियों को कभी शरण क्यों नहीं देता?

दुनिया भर में कहीं भी मार-काट मचा कर भागे मुसलमानों को शरणार्थी बनने के लिए कोई यहूदी, हिन्दू या ईसाई पश्चिमी देश ही क्यों याद आते हैं?
यह शरण मांगना भी एक लड़ाई है. ये भागे हुए लोग नहीं हैं...ये जहाँ भी हैं, अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं और ज्यादा सफल तरीके से लड़ रहे हैं. आखिरी मकसद है ज़मीन पर कब्ज़ा...काफिरों की ज़मीन पर अल्लाह के बंदों का कब्ज़ा. यह रिफ्यूजी-जिहाद है...शरण में आये लोग नहीं...भूखा बच्चा, बदहाल औरत, लाचार आदमी...ये सभी इनके हथियार है.. एक्सपैंशन केअमरीका की NRA अक्सर याद दिलाती रहती है: Guns do not kill people, persons do.

स्पेन के लोगों को आज पता चला, बहुत दर्दनाक तरीक़े से, कि हत्या का इरादा हो तो हथियार तो हवा में से पैदा हो जाते है।

स्पेन ने कभी अपने यहाँ से मुसलमानो को vacuum clean किया था।
पाँच सौ साल में अपना इतिहास भूल गए वे लोग। वामपंथी आए और मुसलमानो को वापिस बूला लिया।

परिणामस्वरूप बार्सिलोना में तेरह लोग सड़क पर मृत पड़े है।
NRA लेकिन ग़लत है। मनुष्य भी नहीं मारते। विचार मारता है।

अफ़ग़ानिस्तान में आज भी सारे हिंदू होते तो........
सबसे बड़ा उदाहरण है भारत। उसी जाति के लोग हिंदू भी है व मुसलमान भी। मुसलमान हो गए उसी जाति के लोग अरब के क़बिलाई व्यक्ति की तरह ही बन गए है।

बदला क्या? विचार। हिंदू ऑपरेटिंग सिस्टम की जगह इस्लाम ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टॉल हो गया।
विचार मारते है।

इस्लाम नाम के विचार को जब तक समाप्त नहीं किया जाता, ऐसे ही फ़ुट्पाथ से अपनो के शव खुरचते रहेंगे काफ़िर।

और समाप्त करने का एक मात्र तरीक़ा है कि मज़हब के बुर्क़े में छुपे इस माफ़िया गैंग का सच जाने, सच फैलायें।
ख़ून पीने वाली जोंक पर नमक छिड़क दो वो मर जाती है।

सच इस्लाम के विरुद्ध नमक हथियार हैं... महर्षि चरक ने चरक संहिता में लिखा है "जो रोग जहाँ उत्पन्न होता है उसकी औषधि वहीँ मौजूद होती है"..आतंकवाद का रोग ७२ हूरों वाले अंधविश्वास की वजह से जन्म लेता है और इसका इलाज भी अन्धविश्वास से ही होगा..आतंकियों के शवों को कूड़े के ढेर में जलाना पड़ेगा जिससे उनकी जन्नत वाली फ्लाइट पंक्चर हो..हमें पता है ऐसा कुछ नहीं होता पर उनके लिए तो ७२ हूरे कलश सजाकर बैठी है न ......अपने को विश्वगुरु कहते घूमते हैं हम तो 'गुरूजी' दो न आतंकवाद का इलाज दुनिया को...नैतिकता वैतिकता के चक्कर में वही गलती मत दोहराना जो पृथ्वीराज चौहान ने 'धर्मयुद्ध' के चक्कर में १६ बार हराकर छोड़ दिया था गौरी को..??

भाड़ में गया धर्मयुद्ध
और
नैतिकता का पाठ..??
ईस्लाम के जानवर समाज के कैंसर हैं और इसका सर्जरी अनिवार्य है !!

किस मौसम में कौन सा पानी पिए।

पानी और बर्तन का ये अधभुत विज्ञानं आपको कोई नहीं बताएगा- 
नमस्कार दोस्तों! यहाँ आपको राजीव जी के बताये घरेलू नुस्खे एवं औषधियां प्राप्त होंगी. तो दोस्तों आज की हमारी चर्चा का विषय है कि किस मौसम में कौन-से बर्तन में पानी पीना ठीक रहता है. गर्मियों का सीजन शुरू होता है होली के बाद से और बारिश के पहले दिन तक मिट्टी के बर्तन में रखे हुए पानी को ही पीना अच्छा रहता है. रात हो या दिन हमेशा जब बारिश शुरु हो जाती है तो उस दिन से लेकर बारिश के अंतिम दिन तक तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी पीना हमेशा अच्छा रहता है।

इसके बाद जब बारिश खत्म होती है तब जाकर सर्दियां शुरु होती है. उस दिन से लेकर फिर होली के दिन तक सोने के बर्तन में रखा हुआ पानी सबसे अच्छा होता है. अब सवाल ये उठता है कि भाई सोने के बर्तन कहां से आएंगे इतनी महंगाई के जमाने में? तो जवाब है कि आप कोई भी बर्तन रख लीजिए उसमें एक सोने की अंगूठी डाल दीजिए या फिर सोने की एक चैन डालकर छोड़ दीजिए।

इससे आपको कुछ फायदा होगा ही पर नुकसान बिलकुल नहीं होगा. सोना बहुत गर्म धातु है और चांदी बहुत ठंडी. तो गर्मियां है तो सोने का पानी जहर है लेकिन वहीं पानी अमृत है जब ठंड का मौसम है. तो ठंड के समय में सोने की अंगूठी में पड़ा हुआ पानी इस्तेमाल करें. राजीव जी ने बताया की वह इस पानी को मेडिसिन के रूप में इस्तेमाल करते हैं. जिनको चक्कर आते हैं, हाथ-पैर टेढ़े हो जाते हैं, मिर्गी के मरीज हैं, जिनको मेंटल डिप्रेशन बहुत होता है, ये सोने का बर्तन उनके लिए सबसे बेस्ट मेडिसिन है. जिनको हमेशा बुरे-बुरे विचार आते रहते हैं कि “अभी मैं मर जाऊंगा”, “अभी वह मर जाएगा” या ऐसा कुछ भी जो पॉजिटिव नहीं है तो उनके लिए भी ये सोने के बर्तन में रखा पानी बेस्ट मेडिसिन है।

जिनको कभी भी अच्छी नींद नहीं आती या रात में वह हमेशा शिकायत करते हैं कि वह सोये नहीं, उनके लिए भी ये बेस्ट मेडिसिन है. जिनका माइंड कभी डेवलप नहीं हो पाया, बहुत बार ऐसा होता है ना कि इन्सान का शरीर बढ़ जाता है, लेकिन माइंड बच्चे का ही रहता है. ऐसे बहुत सारे केस आपके जीवन में आ सकते हैं उनके लिए बेस्ट मेडिसिन है सोने के बर्तन में रखा हुआ पानी।

और आखिरी बात कह दूं के हर बीमारी की बेस्ट मेडिसिन है सोने के बर्तन में रखा हुआ पानी. भले वो कफ हो या सर्दी हो या फिर खांसी-जुकाम, माइग्रेन है तो उनके लिए भी ये बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. 4 महीने जब सर्दियां है तो सोने के बर्तन में रखा पानी पिए और 4 महीने जब गर्मी है तो मिट्टी के घड़े का पानी पीये. और 4 महीने जब बारिश है तो तांबे के बर्तन का पानी पीना है।

पानी पीने का सबसे अच्छा तरीका है सबसे पहले गर्म कर लें या उबाल लें, फिर उसको रुम टेंपरेचर पर ठंडा हो जाने दीजिए. उसके बाद उसको बर्तन में डाल दीजिए चाहे वह मिट्टी का बर्तन हो चाहे तांबे का हो या फिर सोने का हो. फिर उसी को दिनभर पीते रहिए हर समय गर्म करके पीने की जरूरत नहीं है एक बार गर्म करके रूम टेंपरेचर पर ठंडा कर दीजिए फिर उसको किसी भी बर्तन में डालकर सवेरे से शाम तक यूज करते रहिए।